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PM Modi Uttarakhand Visit: मुखबा को मिली नई उम्मीद, CM धामी की थपथपाई पीठ, पढ़ें पीएम मोदी के भाषण की कुछ खास बातें.

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एक दिवसीय दौरे पर मुखबा-हर्षिल पहुंचे प्रधानमंत्री, उत्तराखंड में अब घाम तापो पर्यटन, नए विजन का मंत्र दे गए। उन्होंने कहा कि ये दशक उत्तराखंड का है, प्रगति के लिए नए रास्ते खुले हैं। उनका दौरा कई मायनों में यादगार बन गया। जाते-जाते वह शीतकाली यात्रा के लिए सीएम धामी की पीठ थपथपाकर भी गए। वे देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भारत-तिब्बत सीमा से जुड़े उत्तराखंड के चमोली और पिथौरागढ़ सीमावर्ती जिलों के बाद अब उत्तरकाशी के मुखबा और हर्षिल पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री के नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज होगा। वो देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो गंगा के शीतकालीन पूजा स्थल पहुंचेंगे।

चारधाम शीतकालीन यात्रा का संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को सीमांत जिले उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा और हर्षिल की यात्रा पर पहुंचे। पीएम सुबह भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से सुबह जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयपोर्ट पहुंचे। यहां से उन्होंने एमआई-17 से उत्तरकाशी के लिए उड़ान भरी।

गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की-
प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में दर्शन किए। उन्होंने करीब बीस मिनट तक गर्भगृह में पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही पीएम मोदी के नाम एक रिकॉर्ड दर्ज हो गया। वह देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो  मां गंगा के शीतकालीन पूजा स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले मां गंगा के शीतकालीन प्रवासस्थल मुखबा स्थित गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की।

पीएम ने 20 मिनट तक मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद पीएम मोदी ने हर्षिल की खूबसूरत वादियों का दीदार किया। पीएम ने मुखबा मंदिर और हर्षिल व्यू प्वाइंट से वादियों का निहारा। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में ट्रैकिंग व बाइक रैली को फ्लैग ऑफ किया। गंगा आरती के बाद प्रधानमंत्री ने हर्षिल में जनसभा को संबोधित किया।

पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें-

 

  • पीएम मोदी ने गढ़वाली भाषा में अपने भाषण की शुरुआत की। कहा- म्यारा प्यारा भाई भेणी, मेरी सयवा सोंदी।
  • कहा कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है। मुझे लगता है कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है।
  • पीएम मोदी ने सरकार को बारहमासी पर्यटन का विजन दिया। कहा इससे सालभर रहने वाले रोजगार के अवसर मिलेगा।
  • पीएम ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड का बन रहा है। कहा कि उत्तराखंड की प्रगति के लिए नए रास्ते खुले हैं। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन को महत्वपूर्ण कदम है।
  • पीएम ने कहा कि घाम तापो पर्यटन उत्तराखंड के नया आमाम लेकर आएगा।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि माणा, जादूंग, टिम्मरसैंण में तेजी से पर्यटन बढ़ रहा है। ऐसी व्यवस्था करेंगे जिससे  उत्तराखंड हर सीजन में ऑन सीजन रहेगा।
  • प्रधानमंत्री ने लोगों से उत्तराखंड में आकर शादी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए उत्तराखंड को चुने। साथ ही उन्होंने फिल्मों की शूटिंग के लिए उत्तराखंड को बेहतर बताया।
  • उत्तराखंड में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने की बात पीएम मोदी ने कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
  • कॉरपोरेट घरानों से आग्रह किया कि वह अपनी बैठकों के लिए उत्तराखंड आएं।
  • पीएम मोदी ने कहा कि यहां विंटर योगा सेशन आयोजित किए जाएं।
  • पीएम ने सरकार से कहा कि सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के लिए प्रतियोगिता आयोजित करें। वह उत्तराखंड के विंटर टूरिज्म पर शॉर्ट फिल्म बनाएं। जो सबसे अच्छी बनाएं उन्हें इनाम दें। इससे प्रदेश के खूबसूरत स्थलों की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।

चीणा का भात और फाफरे के पोले…पहाड़ी भोज के मुरीद हुए मोदी-

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहाड़ से हमेशा ही प्रेम रहा है। वह यहां जब भी आते हैं तो कुछ नया जरूर करते हैं। आज वह सीमांत गांव उत्तरकाशी के मुखबा में मां गंगा की पूजा के लिए पहुंचे। पूजा के बाद उन्होंने पहाड़ी खाने का स्वाद चखा। जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पाद चीणा का भात और फाफरे के पोले और क्षेत्र की स्वादिष्ट राजमा के साथ बद्री गाय की दही मठ्ठा का सेवन किया। चीणा और फाफरा का उत्पादन जनपद के हर्षिल घाटी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होता है। तो वहीं यह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होता है। मुखबा में स्थानीय महिलाओं ने यह पकवान तैयार कर पीएम मोदी को परोसा।

पीएम मोदी ने किया हर्षिल की मनमोहक वादियों का दीदार, नजारा देख हुए मंत्रमुग्ध

प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले मां गंगा के शीतकालीन प्रवासस्थल मुखबा स्थित गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की। पीएम ने 20 मिनट तक मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद पीएम मोदी ने हर्षिल की खूबसूरत वादियों का दीदार किया। पीएम ने मुखबा मंदिर और हर्षिल व्यू प्वाइंट से वादियों का निहारा। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में ट्रैकिंग व बाइक रैली को फ्लैग ऑफ किया। हर्षिल उत्तराखंड का ऐसा पर्यटन स्थल है जो हिमालय की गोद में शांति और सुकून की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक दम मुफीद है। यह समुद्र तल से 2500 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। सर्दियों में यहां की वादियां बर्फ से लकदक नजर आती हैं। वहीं, गर्मियों में यहां का नजारा हरियाली से भरपूर दिखता है। यहां कई ट्रेकिंग रूट भी हैं जहां का पर्यटक दीदार कर सकते हैं।

 उत्तराखंड में अब घाम तापो पर्यटन, नए विजन का मंत्र दे गए मोदी

हर्षिल में जनसभा को संबोधिl करते हुए पीएम मोदी ने जहां सरकार को विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए खास मंत्र दिया वहीं, लोगों से विंटर सीजन में उत्तराखंड आने की अपील भी की।

हर्षिल-मुखबा में प्रधानमंत्री पहनेंगे बादामी-स्लेटी रंग की भेंडी, ये है खास तैयारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर्षिल और मुखबा दौरे के दौरान भेड़ की ऊन से बनी बादामी और स्लेटी रंग की भेंडी (कोट) पहनेंगे। इसके साथ ही ब्रह्मकमल और तिरंगे और लाल रंग की पट्टी लगी हुई पहाड़ी टोपी भी उनके लिए तैयार की गई है।

PM Modi Uttarkashi Visit During Harshil-Mukhba visit will wear beige grey coloured coat made of sheep wool

पीएम नरेंद्र मोदी जब कभी देश-दुनिया के दौरे पर जाते हैं तो उनकी वेषभूषा पर सबका ध्यान होता है। वह अपने दौरे के दौरान उस क्षेत्र की वेषभूषा पहनकर स्थानीय लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं। इसी क्रम में आगामी 6 मार्च को पीएम नरेंद्र मोदी भारत-चीन सीमा पर बसे हर्षिल और मुखबा के दौरे पर आ रहे हैं। उनके इस दौरे के लिए उत्तरकाशी की स्थानीय वेषभूषा ऊन की भेंडी के साथ पजामा और पहाड़ी टोपी तैयार की गई है।

इस पहाड़ी परिधान को वीरपुर डुंडा नालंदा एसएचजी महिला स्वयं सहायता समूह की भागीरथी नेगी ने तैयार किया है। जबकि सुरेंद्र नैथानी ने इस पूरी ड्रेस की सिलाई की है। भागीरथी नेगी ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी के लिए बादामी और स्लेटी रंग में दो भेंडी कोट तैयार किए गए हैं। वहीं सफेद रंग के दो पजामे भी बनाए हैं। टोपी को भी भेंडी के रंग के अनुरूप बनाया गया है। इन टोपियों में तिरंगे के केसरी, हरी और सफेद रंग की पट्टी के साथ बल के प्रतीकात्मक लाल रंग की पट्टी और ब्रह्मकमल बनाया गया है।

परिधान दस दिन के भीतर तैयार किए गए
उन्होंने बताया कि भेड़ की ऊन की हाथ से कताई कर यह परिधान तैयार किए गए हैं। इसमें किसी भी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं की गया है। इसे इस तरीके से तैयार किया गया है कि इसकी ऊन में किसी भी प्रकार की चुभन न हो। खास बात यह है कि यह परिधान दस दिन के भीतर तैयार किए गए हैं।

वीरपुर डुंडा निवासी भागीरथी नेगी किन्नौरी समुदाय से आती हैं। भेड़ की ऊन से कपड़े तैयार करने का उनका पुश्तैनी काम है। वे लंबे समय से महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि हर्षिल और मुखबा प्रवास के दौरान पीएम मोदी के जनपद की स्थानीय वेषभूषा पहनने से भेंडी और ऊन के कपड़ों को अच्छी ब्राडिंग मिल सकती है।

प्रधानमंत्री करेंगे विश्व के दूसरे सबसे ऊंचे ट्रेक जनकताल का शिलान्यास

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुखबा और हर्षिल दौरे के दौरान जादूंग घाटी में विश्व के दूसरे ऊंचे ट्रेक जनकताल और नीलापानी घाटी में मुलिंगना पास का शिलान्यास करेंगे। इन दोनों ट्रेक के शुरू होने से 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बंद इस घाटी में पर्यटन के नए आयाम खुलेंगे।वहीं इसे लद्दाख की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखबा, हर्षिल घाटी में प्रस्तावित दौरे में जिले के पर्यटन को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद जग गई है। 1962 के युद्ध के बाद नेलांग और जादूंग सहित सोनम घाटी छावनी में तब्दील हो गई थी। वहां पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही बंद कर दी गई थी। लेकिन अब भौगोलिक परिस्थिति के आधार पर लद्दाख की तर्ज पर विकसित करने की योजना शुरू कर दी गई हैं।

जिला प्रशासन जादूंग-जनकताल और नीलापानी-मुलिंगना पास पर ट्रेक शुरू करने की तैयारी कर रहा है। डीएम डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि हमारा प्रयास है कि पीएम नरेंद्र मोदी अपने दौरे में इन दो ट्रेक का शुभारंभ कर नेलांग-जादूंग घाटी में साहसिक पर्यटन को नया आयाम दें। वहीं नेलांग और जादूंग गांव को बसाने के लिए वाइब्रेंट योजना के तहत होम स्टे निर्माण भी शुरू हो गया है।

Uttarakhand: सिलक्यारा रेस्क्यू अभियान पर अर्नोल्ड डिक्स ने लिखी ‘द प्रोमिस’ किताब, सीएम धामी से की मुलाकात।

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ऑस्ट्रेलिया के टनल विशेषज्ञ प्रो. अर्नोल्ड डिक्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस अवसर पर प्रो. अर्नोल्ड डिक्स ने सिलक्यारा रेस्क्यू अभियान के ऊपर लिखी पुस्तक ‘द प्रोमिस मुख्यमंत्री को भेंट की। अर्नोल्ड के नेतृत्व में ही सिल्यारा टनल अभियान सफल हुआ था।

बता दें, 12 नवंबर 2023 को सुबह 05.30 बजे उत्तरकाशी में सिलक्यारा से बड़कोट के बीच बन रही निर्माणाधीन सुरंग में धंसाव हो गया था। 41 मजदूर निर्माणाधीन सुरंग में फंस गए थे। यह घटना सुरंग के सिलक्यारा वाले हिस्से में 60 मीटर की दूरी में मलबा गिरने के कारण हुई थी। इसके बाद पाइपों के जरिए सुरंग में फंसे हुए श्रमिकों को ऑक्सीजन, पानी, बिजली, पैक भोजन की आपूर्ति के साथ बचाव कार्य शुरू किया गया।

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फंसे हुए श्रमिकों से वॉकी-टॉकी के माध्यम से भी संचार स्थापित किया गया था। इसके साथ ही श्रमिकों को निकालने के लिए पांच योजनाओं पर काम किया गया। बचाव अभियान के 17वें दिन श्रमिक बाहर आ पाए। 

Uttarkashi Fire: उत्तरकाशी में आग से 9 मकान जलकर हुए खाक, 25 परिवार हुए बेघर; एक महिला की मौत.

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मोरी तहसील मुख्यालय से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सावणी गांव में रविवार की रात को भीषण अग्निकांड हुआ। जिसमें 9 भवन खाक हो गए। ये सभी भवन देवदार और कैल की लकड़ी से बने थे। जिससे आग और तेज भड़की। इन भवनों में रखा सारा सामान भी जलकर खाक हो गया है। वहीं आग में झुलसने से एक 76 वर्षीय महिला की मौत हो गई है।

 

सड़क मार्ग स्थित जखोल से पांच किलोमीटर पैदल और अंधेरा होने के कारण राहत बचाव के लिए पहली टीम साढ़े तीन घंटे बाद सावणी पहुंची। लेकिन, उससे पहले गांव में मौजूद ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर कुछ हद तक काबू पाया। रात तीन बजे आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया। आग बुझाते समय कुछ ग्रामीण आग की लपटों से भी झुलसे। सावणी गांव में वर्ष 2018 में भीषण अग्निकांड हुआ था। जिसमें 39 मकान जले 100 मवेशी जले थे।

 

आग ने लिया विकराल रूप-

सावणी में रविवार की रात करीब नौ बजे किताब सिंह के मकान में आग लगी। लकड़ी के मकान होने के कारण आग विकराल होती गई। आग जब एक घर से दूसरे घर में फैलने लगी तो जखोल गांव के ग्रामीणों ने करीब 11 बजे जिला आपदा प्रबंधन व प्रशासन को इसकी सूचना दी।

 

जिलाधिकारी डॉ. मेहराबन सिंह बिष्ट के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्यो के लिए चिकित्सा, पेयजल आदि विभागों को भी मौके पर पहुंचने के लिए निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने राहत व बचाव कार्यों के लिए सतलुज जल विद्युत निगम सहित टोंस वन प्रभाग और गोविंद वन्य जीव विहार के वन कर्मियों का सहयोग लेने के लिए कहा। करीब 12:30 बजे राहत बचाव के लिए गोविंद वन्य जीव विहार की पहली टीम पहुंची।

 

9 मकान जलकर हुए खाक-

उपजिलाधिकारी देवानंद शर्मा ने बताया कि आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया है। राजस्व विभाग के साथ पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, पशुपालन विभाग और वन विभाग मौके पर मौजूद है। गांव में कुल 9 मकान पूर्ण रूप से जल चुके है। जिसमें करीब 15-16 परिवार निवास करते थे। इसके अतिरिक्त 2 मकानों को आग से बचाने के लिए पूर्ण रूप से तोड़ा गया है। 3 मकानों को आंशिक रूप से तोड़ा गया है। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं है।

 

बताया जा रहा है कि किताब सिंह के घर में पूजा का दीया जल रहा था, जिससे आग लगना बताया गया है। इस अग्निकांड में 22-25 परिवार प्रभावित हुए हैं। जिला आपदा प्रबंधन ने मिसिंग चल रही भामा देवी (76) पत्नी नेगी सिंह की आग से झुलसने से मृत्यु होने की पुष्टि की है।

 

Uttarakhand Earthquake: उत्तरकाशी में सुबह से तीन बार आया भूकंप, दहशत में लोग; 3.5 की तीव्रता से आया भूकंप.

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उत्तरकाशी और आसपास के कई इलाकों में शुक्रवार को दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। दहशत के चलते लोग घरों से बाहर निकल आए। लोगों में भय का माहौल है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी तहसीलों से जानकारी जुटाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि पहले सुबह करीब 7 बजकर 42 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस हुए। भूकंप के कारण वरुणावत पर्वत के भूस्खलन जोन से मलबा और पत्थर गिरे। इसके बाद दोबारा 8 बजकर 19 मिनट पर फिर झटके महसूस हुए, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.5 रही। इसके बाद जनपद मुख्यालय में 10:59 बजे तीसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।

 

भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किमी नीचे उत्तरकाशी में था। जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने अधिकारियों को जिले की सभी तहसील क्षेत्रों में भूकंप के असर के बारे में सूचना जुटाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल जिले में कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

Uttarakhand-प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा, फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट किए गए जारी.

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दून अस्पताल में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने का मामला सामने आया है। एंटीरेट्रोवाइरल उपचार इकाई (एआरटी) में तैनात एक चिकित्सक ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इसमें एक वार्ड बॉय के संलिप्त होने की बात भी सामने आ रही है। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से दोनों को हटा दिया है। मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मरीज का प्रमाण पत्र अस्पताल वापस आया और उसने प्रमाण पत्र को स्वीकार न किए जाने की बात कही। जब प्रमाण पत्र की जांच की गई तो पता चला कि अस्पताल के एआरटी इकाई में तैनात चिकित्सक ने यह प्रमाण पत्र जारी किया है। जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति ने पूर्व में पैसे देकर चिकित्सक से फिटनेस मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया था। जहां पर उसको वह मेडिकल जमा करवाना था, वहां के अधिकारियों ने स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और मेडिकल सही न होने की बात कही।

इसके बाद जब वह मेडिकल लेकर अस्पताल आया तो मेडिकल के फर्जी होने की बात सामने आई। चिकित्सक के साथ अस्पताल का ही एक वार्ड बॉय भी शामिल था। यह पूरा मामला प्रकाश में आने के बाद दोनों को एआरटी सेंटर से हटा दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन मामले की उच्च स्तरीय जांच कराएगा।

दो महीने पहले ही चिकित्सक की एआरटी में की गई थी तैनाती-

अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक चिकित्सक को नवंबर में ही दून मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसन से एआरटी सेंटर में तैनात किया गया था। पूर्व में एआरटी सेंटर में चिकित्सक न होने की वजह से संबंधित चिकित्सकों को यहां पर तैनात किया गया था। वे एचआईवी रोगियों की जांच कर रहे थे।

 

सिर्फ फैकल्टी को ही मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का अधिकार-

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में सिर्फ फैकल्टी ही किसी भी प्रकार का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए अधिकृत है। ऐसे में इस तरह के सर्टिफिकेट सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऐसे बनता है सही मेडिकल सर्टिफिकेट-

दून अस्पताल में लोग मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आते हैं। इसके लिए उन्हें सबसे पहले ओपीडी का पर्चा बनवाना पड़ता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को अनिवार्य रूप से फिजिशियन और नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना पड़ता है। वहां आवश्यक जांच पूरी होने के बाद चिकित्सक ओपीडी पर्चे पर ही अपनी रिपोर्ट लिख देते हैं। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कोई भी व्यक्ति मेडिकल सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकता है।

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का मामला सामने आने के बाद संबंधित चिकित्सकों और वार्ड बॉय को एआरटी सेंटर से हटा दिया गया है। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। एआरटी सेंटर में जल्द ही नए चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।

-डॉ. गीता जैन, प्राचार्य, दून मेडिकल काॅलेज

Chardham Yatra: उत्तरकाशी में रात 10 से सुबह 4 बजे तक यातायात पर लगी रोक, जानिये क्यों लिया गया फैसला।

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जनपद में रात 10 से सुबह 4 बजे तक वाहनों के आवागमन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। आगामी मानसून सीजन में चारधाम यात्रा को सुगम व सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। इसी के साथ गंगोत्री हाईवे पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र सोनगाड में अस्थायी पुलिस चौकी खोली गई है, जहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

एसपी अर्पण यदुवंशी ने बताया कि चारधाम यात्रा के सुरक्षित संचालन के लिए पूर्व में जारी विशेष कार्य योजना में आंशिक संशोधन किया गया है। नई एसओपी में रात 8 बजे से सुबह 4 बजे तक यातायात प्रतिबंधित रहेगा।

इस अवधि में ऐसे यात्री वाहन जिनकी होटल बुकिंग होगी, उन्हीं को बैरियरों से आगे होटल तक भेजा जाएगा। जबकि रात 10 बजे बाद किसी वाहन को आगे नहीं भेजा जाएगा। सुबह 4 बजे के बाद ही यातायात पुन: संचालित किया जाएगा। बताया कि पूर्व में जारी एसओपी के अन्य बिंदू यथावत रहेंगे। एसपी ने बताया कि दुर्घटना संभावित क्षेत्र सोनगाड में अस्थाई चौकी भी स्थापित कर दी गई है। 

Uttarakahnd: सहस्त्रताल ट्रैक पर 22 सदस्यीय दल में से 9 ट्रैकर्स की मौत, 10 ट्रैकर्स सुरक्षित, द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन के बाद दूसरा बड़ा हादसा।

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उत्तरकाशी-टिहरी जनपद की सीमा पर करीब 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सहस्त्रताल ट्रैक पर गए 22 सदस्यीय दल में से नौ ट्रैकर्स की मौत हो गई। दस ट्रैकर्स को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। वर्ष 2022 में हुए निम के द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन हादसे के बाद यह दूसरा बड़ा हादसा है।

चार अक्तूबर 2022 को निम के इतिहास में वह तारीख है जिसने निम प्रबंधन को कभी न भूलने वाला गम दिया। हादसे में निम के 34 प्रशिक्षुओं का दल द्रौपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आ गया था जिसमें कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दो लोग अब भी लापता चल रहे हैं।

इनमें उत्तराखंड से नौसेना में नाविक विनय पंवार व हिमाचल निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक वशिष्ट शामिल थे। हालांकि उस दौरान निम के साथ एसडीआरएफ की टीम ने दोनों लापता लोगों की खोजबीन के लिए माइनस 25 डिग्री तापमान में भी विशेष अभियान चलाया।

अब एक और हादसे के खबर उत्तरकाशी-टिहरी जनपद की सीमा पर करीब 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सहस्त्रताल ट्रैक से आई।
कल मंगलवार को चार ट्रैकर की ठंड लगने से मौत हो गई। वहीं आज पांच ट्रैकर्स की और मौत हो गई। दस ट्रैकर्स को सुरक्षित लाया जा चुका है। मौसम खराब होने के कारण ट्रैकर्स रास्ता भटक गए थे। जिले की ट्रैकिंग एजेंसियों के माध्यम से जिला आपदा प्रबंधन को इसकी सूचना मिली। जिससे विभाग ने रेस्क्यू के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
 29 मई को एक 22 सदस्यीय दल मल्ला-सिल्ला से कुश कुल्याण बुग्याल होते हुए सहस्त्रताल की ट्रैकिंग के लिए निकला था। दो जून को यह दल सहस्त्रताल के कोखली टॉप बेस कैंप पहुंचा।
तीन जून को वह सहस्त्रताल के लिए रवाना हुए। वहां अचानक मौसम खराब होने, घने कोहरे और बर्फबारी के बीच ट्रैकर फंस गतए। पूरी रात उन्हें ठंड में बितानी पड़ी। ट्रैकर्स में से किसी ने इसकी सूचना दल को ले जाने वाली गढ़वाल माउंटनेरिंग एवं ट्रैकिंग एजेंसी के मालिक को दी। बताया कि ठंड लगने से चार ट्रैकर की मौत हो गई है जबकि सात की तबीयत खराब है और 11 वहां फंसे हुए हैं।

Uttarkashi: मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर निकाला जुलूस, विरोध प्रदर्शन के दौरान बेहोश हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।

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राजकीय कर्मचारी घोषित करने और मानदेय बढ़ोतरी की मांग पूरी नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। शुक्रवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला। इस दौरान एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संगीता सेमवाल बेहोश हो गई।

जुलूस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पुतलों के साथ निकाला गया। शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जुलूस बस अड्डे तक पहुंचा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सेविका व मिनी आंगनबाड़ी कर्मचारी संगठन के बैनर तले जनपद भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुईं।

कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंककर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 19 फरवरी से कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। जिनके धरने को आज 25 दिन पूरे हो चुके हैं। अब लोकसभा चुनाव के लिए कभी भी आचार संहिता लगने और मांगे पूरी न होने पर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।