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Chardham Yatra 2025: पंजीकरण का आंकड़ा पहुंचा 10 लाख पार… केदारनाथ धाम जाने के लिए हुए सबसे अधिक रजिस्ट्रेशन.

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चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन आधार आधारित पंजीकरण का आंकड़ा 10 लाख पार हो चुका है। इसमें केदारनाथ धाम के लिए सबसे अधिक 3.29 लाख तीर्थयात्री पंजीकरण कर चुके हैं। यात्रा शुरू होने के बाद 40 प्रतिशत पंजीकरण ऑफलाइन किए जाएंगे।

पर्यटन विभाग ने 30 अप्रैल से शुरू हाे रही चारधाम यात्रा के लिए 20 मार्च से ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया था। 10 दिन के भीतर यात्रा के लिए अलग-अलग तिथियों में 10 लाख से अधिक तीर्थयात्री पंजीकरण कर चुके हैं। बाबा केदार के कपाट दो मई को खुल रहे हैं। जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट चार मई को खुलेंगे। 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा का आगाज होगा।

पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार केदारनाथ धाम के लिए 3.29 लाख, बदरीनाथ धाम के लिए 3.02 लाख, गंगोत्री के लिए 1.85 लाख व यमुनोत्री धाम की यात्रा के लिए 1.79 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार 60 प्रतिशत पंजीकरण ऑनलाइन किए जा रहे हैं। जबकि 40 प्रतिशत पंजीकरण यात्रा शुरू होने के बाद आफलाइन की जाएगी। इसके लिए हरिद्वार, ऋषिकेश के साथ यात्रा मार्गों पर पंजीकरण केंद्र खोले जाएंगे।

 

 

Kedarnath Heli Service: इस बार भी IRCTC करेगा बुकिंग, 24 घंटे पहले टिकट रद्द किया तो वापस नहीं मिलेगा पैसा.

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चारधाम यात्रा में केदारनाथ धाम के लिए हेलिकॉप्टर टिकटों की बुकिंग अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू करने की तैयारी है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) जल्द ही बुकिंग की तिथि घोषित करेगा।

इस बार भी ऑनलाइन हेली टिकटों की बुकिंग आईआरसीटीसी के माध्यम से की जाएगी। यूकाडा ने टिकटों को रद्द करने व किराया वापस करने के लिए नीति बनाई है। यदि कोई यात्री उड़ान समय से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करता है तो हेली कंपनी किराया वापस नहीं करेगी। 48 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर किराये का 25 प्रतिशत ही वापस मिलेगा।

यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा केदारनाथ हेली सेवा के लिए मारामारी रहती है। इस बार भी केदारनाथ धाम के लिए गुप्तकाशी, फाटा व सिरसी हेलिपैड से पवन हंस, हिमालयन हेली, ट्रांस भारत, ग्लोबल विक्ट्रा, थंबी एविएशन, केस्ट्रल एविएशन, एयरो एयरक्राफ्ट के माध्यम से हेली सेवा संचालित की जाएगी।

टिकट रद्द एवं किराया वापस नीति के अनुसार यात्रा तिथि से पांच दिन पहले टिकट रद्द करने पर 50 प्रतिशत किराया वापस होगा। जबकि पांच से अधिक दिन पहले टिकट रद्द करने पर किराया राशि का 75 प्रतिशत वापस मिलेगा। इसके अलावा खराब मौसम या तकनीकी कारणों के चलते उड़ान रद्द होने पर हेली कंपनी यात्रियों को पूरा किराया वापस करेगी।

 

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यूकाडा की सीईओ सोनिका ने बताया कि केदारनाथ हेली सेवा के लिए सभी तैयारी पूरी है। जल्द ही टिकटों की बुकिंग के लिए तिथि तय की जाएगी। हेली टिकट बुकिंग करने के बाद यदि यात्री किसी कारण से टिकट रद्द करता है तो उसे नीति के अनुसार किराया वापस किया जाएगा।

 

यमुनोत्री व गंगोत्री हेली सेवा के लिए डीजीसीए की अनुमति का इंतजार-

प्रदेश सरकार इस बार यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के लिए हवाई सेवा से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए डीजीसीए से अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है। डीजीसीए तकनीकी व सुरक्षा मानकों का परीक्षण करने के बाद ही अनुमति देती है। हालांकि यमुनोत्री धाम के लिए हेलिकॉप्टर की लैंडिंग का ट्रायल भी हो चुका है।

 

केदारनाथ हेली सेवा का किराया-

रूट                           2023     2024    प्रस्तावित किराया
सिरसी से केदारनाथ      5498     5,772      6061
फाटा से केदारनाथ        5500    5,774      6063
गुप्तकाशी से केदारनाथ  7740     8,126     8533
नोट-प्रति किराया आने व जाने का है।

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राज्य में लागू समान नागरिक संहिता के तहत लिव इन रिलेशनशिप के विरोध पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर पीछे नहीं हटेगी। अलबत्ता जो भी सुझाव आएंगे, उनका स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री नई दिल्ली में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 के चुनाव में हमने प्रदेश की जनता को वचन दिया था कि भाजपा की सरकार बनेगी तो राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू करेंगे। हमने अपना वचन पूरा किया। लिव इन रिलेशनशिप के विरोध पर उन्होंने कहा कि बेशक यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। लेकिन उच्चतम न्यायालय में यह विषय कई बार आया है।

हम लोकतांत्रिक मान्यताओं को मानने वाले लोग हैं। लिव इन रिलेशनशिप पर यदि कोई सुझाव आएगा तो उसका स्वागत करेंगे। लेकिन सरकार इस पर अब पीछे नहीं हटेगी।चारधाम यात्रा के दौरान रील कल्चर पर रोक से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तीर्थांटन और पर्यटन के फर्क को समझना होगा।
बैकफुट में नहीं जाएंगे: धामी

चारधाम यात्रा विशुद्ध रूप से यात्रा होनी चाहिए। हमारे पूर्वजों के समय से यात्रा के नियम बने हैं। ये यात्रा धर्म के लिए है। पुराने रील चलाने से देश और दुनिया में गलत संदेश जाता है। सीएम ने कहा कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ में पीएम मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में पुनर्निर्माण कार्य हुए।

केदारनाथ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए इकोलॉजी का पूरा ध्यान रखा गया। इकोलॉजी और इकॉनमी में संतुलन हमारी सरकार के विकास का मॉडल है। धामों की अपनी एक धारण क्षमता है। इसलिए हम भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में नए स्थान विकसित कर रहे हैं। इन रिलेशनशिप का अब रिकॉर्ड है। कोई चेंज नहीं होगा। बैकफुट में नहीं जाएंगे। सुझावों को शामिल करेंगे।

 

 

आपदाएं राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती- धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपदाएं हैं। यहां बादल फटने, भूस्खलन, हिमस्खलन की घटनाएं अकसर होती हैं। सिलक्यारा टनल हादसे पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन, संवेदनशीलता और सहयोग से यह ऑपरेशन सफल रहा। आज वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे हैं।

 

 

हम कानून पर चलने वाले, इसलिए विरोध नहीं होता- धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और दुनिया के लोग देवभूमि को आस्था व श्रद्धा से देखते हैं। इसलिए राज्य में अतिक्रमण किसी भी कीमत पर सही नहीं है। अतिक्रमण हटाने का अभियान रुकने वाला नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अवैध मदरसों और मजारों के खिलाफ छेड़े गए अभियान का इसलिए विरोध नहीं होता क्योंकि हम कानून पर चलने वाले लोग हैं। राज्य में हर कार्रवाई और अभियान कानून के तहत हो रहे हैं। अनेक स्थानों में सरकारी भूमि पर अवैध मजारें बनीं थीं। इस लैंड जिहाद के खिलाफ हमने अभियान चलाया। करीब 6000 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई। राज्य में मदरसों में पढ़ने वालों की पहचान छुपाई जा रही थी। जहां भी मदरसे अवैध पाए गए, उन्हें सील किया गया। हमारा मानना है कि देवभूमि की पवित्रता बनीं रहनी चाहिए।

 

वक्फ कानून भी राज्य में लागू कराएंगे-

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और डेमोग्राफी में बदलाव रोकने के लिए हमने सत्यापन अभियान चलाया। यूसीसी लागू किया। लैंड जिहाद रोकने के लिए अतिक्रमण हटाए। जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून बनाया। उत्तराखंड में वक्फ कानून भी लागू कराएंगे।

 

पीएम मोदी आधुनिक भारत के शिल्पकार- धामी

प्रधानमंत्री के साथ काम करने के अनुभव को भी सीएम धामी ने साझा किय। उन्होंने पीएम को आधुनिक भारत का शिल्पकार बताया। उन्होंने पीएम के साथ अपनी पहली मुलाकात के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि पीएम हर छोटी चीज पर ध्यान देते हैं। सामान्य व्यक्ति की चिंता करते हैं।

Kedarnath Temple: इस बार संगम पर बने पुल से मंदिर तक पहुंचेंगे श्रद्धालु, आपदा के 11 साल बाद बनकर हुआ तैयार.

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आपदा के ग्यारह वर्ष बाद केदारनाथ मंदिर तक पहुंच के लिए स्थायी पैदल पुल बनकर तैयार हो गया है और इस वर्ष बाबा केदार के भक्त इसी पुल से होकर मंदाकिनी नदी किनारे बने आस्था पथ से मंदिर तक पहुंचेंगे। लोक निर्माण विभाग ने दो वर्ष में 54 मीटर लंबे पैदल पुल का निर्माण किया है।

 

इस पुल के बनने से हेलिपैड से मंदिर तक की दूरी भी कम हो गई है। आगामी 2 मई से केदारनाथ यात्रा शुरू होगी। इस वर्ष पैदल व हेलिकॉप्टर से धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु मंदाकिनी व सरस्वती नदी के संगम पर बने 54 मीटर लंबे पुल से होकर मंदाकिनी नदी किनारे निर्मित आस्था पथ के रास्ते लगभग 450 मीटर की दूरी तय कर मंदिर में पहुंचेंगे।

यहां पर बाबा केदार के दर्शन कर श्रद्धालुओं को मंदिर मार्ग से वापस भेजा जाएगा। बीते दो वर्षों तक श्रद्धालु हेलिपैड से सरस्वती नदी किनारे बने आस्था पथ से होकर भैरवनाथ जाने वाले पुल से मंदिर तक पहुंच रहे थे।

इस दौरान उन्हें लगभग 800 मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही थी। लेकिन, अब संगम पर बने पुल से यह दूरी 500 मीटर रह गई है।

बता दें कि 16/17 जून 2013 में आपदा से केदारनाथ में व्यापक नुकसान हो गया था। तब सैलाब में संगम पर बना स्थायी पुल भी बह गया था। पुल के बहने के बाद मंंदिर तक पहुंच के लिए बैली ब्रिज बनाया गया था, जिससे बीते नौ वर्ष तक यात्रा संचालित होती रही।

केदारनाथ पुनर्निर्माण के तहत वर्ष 2022 में इस पुल को हटाकर स्थायी पुल का कार्य शुरू किया गया था। लोक निर्माण विभाग ने विषम परिस्थितियों में करीब ढाई वर्ष में इस पुल को तैयार किया है। अब इसी पुल के सहारे केदारनाथ मंदिर तक पहुंचा जाएगा।

Kedarnath: बर्फ की घाटी से होकर बाबा केदार के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु, हिमखंडों को काटकर बन रहा रास्ता, देखें तस्वीरें.

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Kedarnath Dham: बीते दिनों केदारनाथ में भारी बर्फबारी हुई थी। जिसके बाद से यहां भारी मात्रा में बर्फ जम गई है। लोनिवि के मजदूर बर्फ हटाने में जुटे हैं।

दो मई से शुरू होने वाली केदारनाथ यात्रा के दौरान बाबा केदार के भक्त बर्फ की संकरी घाटी से होकर धाम पहुंचेंगे। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से लिनचोली के बीच पसरे विशालकाय हिमखंडों को काटकर लोक निर्माण विभाग के मजदूर रास्ता तैयार करने में जुटे हैं।

इस वर्ष फरवरी पहले सप्ताह और इस माह के पहले व दूसरे सप्ताह में केदारनाथ सहित पैदल मार्ग तक भारी बर्फबारी हुई थी। इन दिनों भी केदारनाथ में तीन फीट से अधिक बर्फ जमा है।

 

 

वहीं, गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से केदारनाथ तक बर्फ के कारण पैदल आवाजाही संभव नहीं है। यहां बीते 14 मार्च से लोक निर्माण विभाग के 70 से अधिक मजदूर बर्फ को काटकर रास्ता बनाने में जुटे हैं।

11 दिनों में लगभग ढाई किमी हिस्से में बर्फ साफ कर आवाजाही के लिए रास्ता तैयार हो चुका है। इन दिनों मजदूर थारू हिमखंड को काटने में जुटे हैं। यहां पर लगभग 20 फीट ऊंचे हिमखंड को काटकर ढाई फीट चौड़ा रास्ता बनाया जा रहा है।

बर्फ काटने से यहां गहरी व संकरी घाटी सी बन गई है। इन हालातों में यहां बर्फ खिसकने का खतरा बना है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता विनय झिक्वांण ने बताया कि मौसम अनुकूल नहीं होने के बाद भी बर्फ सफाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। हिमखंड जोन पर आने वाले दिनों में रास्ते की चौड़ाई बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

Uttarakhand: प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं के लिए बनेगा स्वास्थ्य परिचालन केंद्र, चारधाम यात्रियों को मिलेगी मदद.

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चारधाम यात्रा के दौरान आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए पहली बार उत्तराखंड में स्वास्थ्य परिचालन केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। लगभग पांच करोड़ की लागत से इस केंद्र को स्थापित किया जाएगा।

इस बार चारधाम यात्रा की शुरुआत 30 अप्रैल से हो रही है। यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड के साथ ऑक्सीजन की कमी से तीर्थ यात्रियों की अचानक तबीयत बिगड़ने से हार्ट अटैक का खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चारधाम यात्रा मार्ग पर 26 मेडिकल रिस्पांस प्वाइंट व 50 स्क्रीनिंग सेंटर बनाए जाते हैं।

इसके अलावा मार्गों पर स्थायी स्वास्थ्य केंद्र व अस्पताल भी हैं। लेकिन अभी तक यात्रा के दौरान आपात स्थिति में तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपना परिचालन केंद्र नहीं है। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य परिचालन केंद्र को मंजूरी दे दी है। इसके लिए पांच करोड़ की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने परिचालन केंद्र के लिए महानिदेशालय में जगह उपलब्ध करा दी है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले परिपालन केंद्र को संचालित किया जाए। जिससे एक ही जगह से चारधामों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी हो सकेगी। इसके साथ ही आपात स्थिति में किसी श्रद्धालुओं को हायर सेंटर रेफर करना है या एयर लिफ्ट की आवश्यकता है तो परिचालन केंद्र से त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
 

परिचालन केंद्र से 24 घंटे चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की जाएगी। अभी तक यह व्यवस्था नहीं थी। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में पहली बार यह केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इस बार हमारा प्रयास है कि यात्रा के दौरान किसी भी तीर्थयात्री की मौत न हो। -डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य

PM Modi Uttarkashi Visit: देश तक पहुंचा शीतकालीन यात्रा का संदेश, चारधाम यात्रा का आधार भी होगा तैयार.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केमेस्ट्री से बहुत कम समय में उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा देश-दुनिया की नजरों में आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा और खूबसूरत हर्षिल से पूरे देश में शीतकालीन यात्रा का संदेश पहुंचा। उन्होंने जिस अंदाज में उत्तराखंड की यात्रा का प्रमोशन किया है, वह अभूतपूर्व है। इसके बाद उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन के सरपट दौड़ने की पूरी उम्मीद की जा रही है। इससे चारधाम यात्रा की मजबूती का आधार पर तैयार होगा।

प्रधानमंत्री का यह प्रवास उस वक्त हुआ है, जब दो महीने की शीतकालीन यात्रा शेष है। इसके बाद 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा का श्रीगणेश होना है। ऐसे में प्रधानमंत्री के एक प्रवास ने उत्तराखंड की दोनों यात्राओं के लिए बेहतर आधार तैयार कर दिया है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड का हर तरह से प्रमोशन किया। प्रमोशन के लिए घाम तापो पर्यटन की बात हो, धर्माचार्यों और योगाचार्यों से शीतकाल में योग शिविर आयोजित करने की बात हो, कॉरपोरेट को सेमिनार का सुझाव हो, फिल्म निर्माताओं को फिल्मों की शूटिंग के लिए आह्वान हो या फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से अपील हो, सबने अपना अलग प्रभाव छोड़ा है।

रजत जयंती वर्ष में सबसे गंभीर प्रयास-

उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन यात्रा का सबसे बड़ा प्रमोशन कर दिया है। इस यात्रा के प्रमोशन के लिए इससे पहले कभी इतने गंभीर प्रयास नहीं हुए। उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा के साथ प्रधानमंत्री के जुड़ाव के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो प्रयास किए थे, उसका सार्थक परिणाम सामने आया है। बहुत कम समय में उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा और पर्यटन देश-दुनिया की नजरों में आ गए हैं।

 

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फिर साबित हुए सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर-

प्रधानमंत्री एक बार फिर उत्तराखंड के लिए सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर साबित हुए हैं। केदारनाथ धाम का उदाहरण सामने है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता से श्रद्धालुओं के पहुंचने के नए रिकार्ड बने हैं। शीतकालीन यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा प्रधानमंत्री ने 28 जनवरी को राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ के मौके पर ही जाहिर कर दी थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव ही है, वह कार्यक्रम में बदलाव के बावजूद मुखवा-हर्षिल पहुंच गए।

मुखबा हर्षिल निहाल, पीएम-सीएम का आभार-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखवा आगमन से पूरा क्षेत्र निहाल है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है, जबकि कोई प्रधानमंत्री मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचा हो। गंगोेत्री मंदिर के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है-यह अवसर गौरवान्वित करने वाला है। तीर्थ पुरोहित और लोक कलाकार रजनीकांत सेमवाल कहते हैं-मुखवा का चयन करने के लिए पीएम व सीएम के प्रति हम आभारी हैं।

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एक दिवसीय दौरे पर मुखबा-हर्षिल पहुंचे प्रधानमंत्री, उत्तराखंड में अब घाम तापो पर्यटन, नए विजन का मंत्र दे गए। उन्होंने कहा कि ये दशक उत्तराखंड का है, प्रगति के लिए नए रास्ते खुले हैं। उनका दौरा कई मायनों में यादगार बन गया। जाते-जाते वह शीतकाली यात्रा के लिए सीएम धामी की पीठ थपथपाकर भी गए। वे देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भारत-तिब्बत सीमा से जुड़े उत्तराखंड के चमोली और पिथौरागढ़ सीमावर्ती जिलों के बाद अब उत्तरकाशी के मुखबा और हर्षिल पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री के नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज होगा। वो देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो गंगा के शीतकालीन पूजा स्थल पहुंचेंगे।

चारधाम शीतकालीन यात्रा का संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को सीमांत जिले उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा और हर्षिल की यात्रा पर पहुंचे। पीएम सुबह भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से सुबह जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयपोर्ट पहुंचे। यहां से उन्होंने एमआई-17 से उत्तरकाशी के लिए उड़ान भरी।

गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की-
प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में दर्शन किए। उन्होंने करीब बीस मिनट तक गर्भगृह में पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही पीएम मोदी के नाम एक रिकॉर्ड दर्ज हो गया। वह देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो  मां गंगा के शीतकालीन पूजा स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले मां गंगा के शीतकालीन प्रवासस्थल मुखबा स्थित गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की।

पीएम ने 20 मिनट तक मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद पीएम मोदी ने हर्षिल की खूबसूरत वादियों का दीदार किया। पीएम ने मुखबा मंदिर और हर्षिल व्यू प्वाइंट से वादियों का निहारा। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में ट्रैकिंग व बाइक रैली को फ्लैग ऑफ किया। गंगा आरती के बाद प्रधानमंत्री ने हर्षिल में जनसभा को संबोधित किया।

पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें-

 

  • पीएम मोदी ने गढ़वाली भाषा में अपने भाषण की शुरुआत की। कहा- म्यारा प्यारा भाई भेणी, मेरी सयवा सोंदी।
  • कहा कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है। मुझे लगता है कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है।
  • पीएम मोदी ने सरकार को बारहमासी पर्यटन का विजन दिया। कहा इससे सालभर रहने वाले रोजगार के अवसर मिलेगा।
  • पीएम ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड का बन रहा है। कहा कि उत्तराखंड की प्रगति के लिए नए रास्ते खुले हैं। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन को महत्वपूर्ण कदम है।
  • पीएम ने कहा कि घाम तापो पर्यटन उत्तराखंड के नया आमाम लेकर आएगा।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि माणा, जादूंग, टिम्मरसैंण में तेजी से पर्यटन बढ़ रहा है। ऐसी व्यवस्था करेंगे जिससे  उत्तराखंड हर सीजन में ऑन सीजन रहेगा।
  • प्रधानमंत्री ने लोगों से उत्तराखंड में आकर शादी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए उत्तराखंड को चुने। साथ ही उन्होंने फिल्मों की शूटिंग के लिए उत्तराखंड को बेहतर बताया।
  • उत्तराखंड में 50 टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने की बात पीएम मोदी ने कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
  • कॉरपोरेट घरानों से आग्रह किया कि वह अपनी बैठकों के लिए उत्तराखंड आएं।
  • पीएम मोदी ने कहा कि यहां विंटर योगा सेशन आयोजित किए जाएं।
  • पीएम ने सरकार से कहा कि सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के लिए प्रतियोगिता आयोजित करें। वह उत्तराखंड के विंटर टूरिज्म पर शॉर्ट फिल्म बनाएं। जो सबसे अच्छी बनाएं उन्हें इनाम दें। इससे प्रदेश के खूबसूरत स्थलों की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।

चीणा का भात और फाफरे के पोले…पहाड़ी भोज के मुरीद हुए मोदी-

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहाड़ से हमेशा ही प्रेम रहा है। वह यहां जब भी आते हैं तो कुछ नया जरूर करते हैं। आज वह सीमांत गांव उत्तरकाशी के मुखबा में मां गंगा की पूजा के लिए पहुंचे। पूजा के बाद उन्होंने पहाड़ी खाने का स्वाद चखा। जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पाद चीणा का भात और फाफरे के पोले और क्षेत्र की स्वादिष्ट राजमा के साथ बद्री गाय की दही मठ्ठा का सेवन किया। चीणा और फाफरा का उत्पादन जनपद के हर्षिल घाटी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होता है। तो वहीं यह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होता है। मुखबा में स्थानीय महिलाओं ने यह पकवान तैयार कर पीएम मोदी को परोसा।

पीएम मोदी ने किया हर्षिल की मनमोहक वादियों का दीदार, नजारा देख हुए मंत्रमुग्ध

प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले मां गंगा के शीतकालीन प्रवासस्थल मुखबा स्थित गंगा मंदिर में पूजा अर्चना की। पीएम ने 20 मिनट तक मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद पीएम मोदी ने हर्षिल की खूबसूरत वादियों का दीदार किया। पीएम ने मुखबा मंदिर और हर्षिल व्यू प्वाइंट से वादियों का निहारा। इसके बाद पीएम ने हर्षिल में ट्रैकिंग व बाइक रैली को फ्लैग ऑफ किया। हर्षिल उत्तराखंड का ऐसा पर्यटन स्थल है जो हिमालय की गोद में शांति और सुकून की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक दम मुफीद है। यह समुद्र तल से 2500 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। सर्दियों में यहां की वादियां बर्फ से लकदक नजर आती हैं। वहीं, गर्मियों में यहां का नजारा हरियाली से भरपूर दिखता है। यहां कई ट्रेकिंग रूट भी हैं जहां का पर्यटक दीदार कर सकते हैं।

 उत्तराखंड में अब घाम तापो पर्यटन, नए विजन का मंत्र दे गए मोदी

हर्षिल में जनसभा को संबोधिl करते हुए पीएम मोदी ने जहां सरकार को विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए खास मंत्र दिया वहीं, लोगों से विंटर सीजन में उत्तराखंड आने की अपील भी की।

Haridwar News: सीएम धामी बोले- इस बार चारधाम यात्रा होगी और बेहतर, लगातार की जा रही है समीक्षा.

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चारधाम यात्रा इस बार सुगम होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आश्वस्त किया कि चारधाम यात्रा को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है, जिससे कि यात्रियों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़ा।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस बार चार धाम यात्रा और बेहतर होगी। आने वाले सभी श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों के लिए हर चीज व्यवस्थित हो, सुविधाजनक यात्रा हो, लोगों को कम से कम कष्टों का सामना करना पड़े, हर मामले में हम लगातार समीक्षा कर रहे हैं।

 

 

सीएम धामी ने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभव के आधार पर यात्रा को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

Uttarakhand: इस बार 2 मई को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, महाशिवरात्रि के शुभ पर्व पर घोषित हुई तिथि.

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ऊधमसिंह नगर जिले में ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर लगे प्रतिबंध को इस साल के लिए हटा लिया गया है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक समाचार एजेंसी के माध्यम से दी। इस प्रतिबंध का किसान संगठनों ने लगातार विरोध किया था। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने आंदोलन की चेतावनी दी थी, जबकि गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले साल इस पाबंदी को फिर से लागू किया जा सकता है।

पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में आज महाशिवरात्रि के अवसर पर केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हुई। आचार्य द्वारा पंचांग गणना के अनुसार मंदिर के कपाट खुलने की तिथि व समय घोषित किया गया।

इसके लिए केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग भी ऊखीमठ पहुंच गए थे। पुजारी शिव शंकर लिंग, बागेश लिंग और गंगाधर लिंग ने बताया कि ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह छह बजे से पूजा-अर्चना शुरू हुई। बाबा केदार को बाल भोग, महाभोग लगाते हुए आरती की गई। इसके उपरांत रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में श्री केदारनाथ धाम के कपाट दो मई को खोले जाने की तिथि घोषित की गई।