Category Archive : अपराध

सांसद त्रिवेंद्र ने लोकसभा में उठाया अवैध खनन का मुददा

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हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को लोकसभा में अवैध खनन से भरे ट्रकों और उनसे सड़कों पर जनता की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुददे की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।उन्होंने लोकसभा स्पीकर के जरिए केंद्र सरकार से मांग की कि अवैध तरीके से खनन सामग्री से भरे तेज गति से सड़कों पर चल रहे वाहनों की निगरानी के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित की जाए। उन्होंने अवैध खनन सामग्री ढोने वाले ट्रक मालिकों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। ऐसा दूसरी बार हुआ जब हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकसभा सदन में हरिद्वार समेत पूरे राज्य में अवैध खनन का मुददा उठाया है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधमसिंह नगर के जिलों में रात के समय अवैध रूप से संचालित खनन ट्रकों का संचालन हो रहा है। यह कानून और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है। अपितु आम जनमानस की सुरक्षा को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। यह देखा गया है कि राज्य सरकार और प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बाबजूद खनन माफियाओं द्वारा रात्रि के समय ट्रकों का अवैध संचालन धडल्ले से किया जा रहा है। इन ट्रकों में भारी मात्रा में ओवरलोडिंग की जाती है। बिना किसी वैध अनुमति के खनिजों का परिवहन किया जाता है। अवैध गतिविधियों के कारण राज्य में सड़कों, पुलों के बुनायादी ढांचे को भारी क्षति हो रही है। इससे आम नागारिकों के लिए आवागमन कठिन हो गया है। सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि लापरवाही और तेज गति से वाहन संचालन के कारण सड़क दुर्घटनाओं लगातार बृद्धि हो गई है। कई निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। कई घायल हो चुके है। ट्रक चालकों द्वारा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और नशे की हालत में वाहन चलाना स्थानीय प्रशासन से मिलीभगत के चलते स्थिति और भी भयावह होती जा रही है।

 

उन्होंने स्पीकर के जरिए कहा कि यह भी आवश्यक है कि केंद्र सरकार इस गंभीर समस्या की ओर तत्काल ध्यान दे। प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

त्रिवेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार और उत्तराखंड राज्य प्रशासन से आग्रह करते है कि अवैध खनन गतिविधियों को रोकने के लिए यह विशेष टास्क फोर्स गठित की जाए। रात्रि के समय खनन के वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाए और सख्ती से निगरानी की जाए। ओवरलोडिंग रोकने हेतु सभी मुख्य मार्गो पर चेक पोस्ट लगाए जाए।

दोषी ट्रक मालिकों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इस मामले में संलिप्त अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। लापरवाही बरतने वालों पर कठोर अनुशासत्मक कार्यवाही की जाए।

व्यापारियों के प्रदर्शन के बाद यूकेडी के दो नेता गिरफ्तार

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क्षेत्रीय राजनीतिक ताकत उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के दो नेताओं आशुतोष नेगी और आशीष नेगी को होटल में जबरन घुसकर धमकी देने और अभद्रता करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।मामला तब गंभीर हुआ जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और व्यापारियों ने कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस मुद्दे पर राजनीति तेज होने के पूरे आसार बन गए हैं।

 

क्या है मामला?

रजवाड़ा रेस्टोरेंट, नालापानी चौक रायपुर के मैनेजर आशीष शर्मा की शिकायत के अनुसार, उनका एक कर्मचारी सैफ 20 दिन काम करने के बाद 25 फरवरी को नौकरी छोड़कर चला गया। 26 फरवरी की शाम यूकेडी के छह-सात कार्यकर्ता सैफ के साथ रेस्टोरेंट पहुंचे और जबरन हंगामा करते हुए रेस्टोरेंट के मालिक दीपक गुप्ता व स्टाफ से बदसलूकी की।
आरोप है कि आशुतोष नेगी और आशीष नेगी ने दबाव बनाकर सैलरी के नाम पर 12,600 रुपये वसूले और प्रतिष्ठान की छवि खराब करने की धमकी दी।

व्यापारियों का प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई

घटना के विरोध में व्यापारियों ने देहरादून एसएसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज हैं। आशुतोष नेगी पौड़ी का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर आठ मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

चैंपियन से विवाद के बीच MLA उमेश के कैंप कार्यालय पर नकाबपोशों ने की फायरिंग, घटना CCTV में कैद

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उत्तराखंड में खानपुर विधायक उमेश कुमार के रुड़की स्थित कैंप कार्यालय के बाहर नकाबपोश बदमाशों ने कई राउंड हवाई फायरिंग कर दी। फायरिंग से कैंप कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों में दहशत फैल गई। फायरिंग की घटना कैंप कार्यालय के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। मामले में पुलिस ने अज्ञात में केस दर्ज कर फायरिंग करने वालों की तलाश शुरू कर दी है।

 

बता दें कि खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक चैंपियन के बीच जनवरी माह में विवाद हुआ था। जिसके बाद चैंपियन ने 26 जनवरी को समर्थकों के साथ रुड़की स्थित उमेश कुमार के कैंप कार्यालय पर पहुंचकर उनके समर्थकों से मारपीट कर दी थी। साथ ही कई राउंड हवाई फायरिंग कर दी थी। जबकि उमेश भी पिस्टल लेकर चैंपियन के कार्यालय की तरफ दौड़े थे। मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों पर केस दर्ज कर लिया था। साथ ही चैंपियन और उनके समर्थकों को जेल भेज दिया था। तभी से चैंपियन जेल में ही बंद है। इसे लेकर पुलिस की ओर से गंगनहर पटरी किनारे स्थित दोनों के कैंप कार्यालय पर सुरक्षा बढ़ा दी थी। लेकिन अब एक बार फिर विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय पर नकाबपोश बदमाशों ने हवाई फायरिंग कर पुलिस की चिंता फिर से बढ़ा दी है।

 

दरसअल, बृहस्पतिवार की अलसुबह बाइक सवार नकाबपोश बदमाश विधायक उमेश के कैंप कार्यालय के बाहर पहुंचे और हवाई फायरिंग कर दी। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने घटना की सूचना विधायक उमेश कुमार और उनके निजी सचिव जुबैर काजमी को दी। वहीं, सूचना मिलते ही पुलिस में भी खलबली मच गई। पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। इस दौरान पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे चेक किए तो नकाबपोश संदिग्ध फायरिंग करते भी दिखे। मामले में निजी सचिव की ओर से सिविल लाइंस कोतवाली में पुलिस को तहरीर दी गई है। एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि तहरीर के आधार पर अज्ञात बदमाशों पर केस दर्ज कर लिया है। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के आधार पर बदमाशों और उनकी बाइक की पहचान की जा रही है। जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा।

 

24 फरवरी को हटी थी पुलिस सुरक्षा

विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय के बाहर और अंदर 26 जनवरी की घटना के बाद से पुलिस तैनात की गई थी। अब मामला शांत हुआ था तो 24 फरवरी को पुलिस सुरक्षा हटा दी गई थी। जबकि बैरिकेडिंग हटाकर भी चार पहिया वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई थी। अब फायरिंग के बाद फिर से पुलिस सुरक्षा का कड़ा पहरा बैठा दिया गया है।

…तो सुरक्षा हटने की थी पूरी जानकारी

जिस तरह से उमेश कुमार के कैंप कार्यालय पर नकाबपोश बदमाशों ने फायरिंग की है उससे आशंका जताई जा रही है कि बदमाशों को यह जानकारी थी कि अब पुलिस सुरक्षा हट गई है। इसलिए उन्होंने फायरिंग की घटना को अंजाम दिया है। वहीं, पुलिस मामले में हर बिंदू पर गहनता से जांच कर रही है।

लोकल या बाहरी, इसकी चल रही जांच

चैंपियन और उमेश के विवाद के बाद भी सोशल मीडिया पर दोनों के समर्थक आपस में भिड़ रहे हैं। हाल ही में विधायक उमेश कुमार ने एक वीडियो पोस्ट की थी जिसमें मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर 28 फरवरी को पहुंचने की बात कही थी। साथ ही एक युवक को भी धमकी दी थी। ऐसे में पुलिस की जांच इस तरफ चल रही है कि फायरिंग करने वाले लोकल हैं या बाहरी हैं।

Uttarakhand: वन विभाग में करोड़ों का घोटाला, अपने  ऐशो-आराम पर लुटा दिया फंड !

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वन विभाग में करोड़ों का घोटाला,अपने  ऐशो-आराम पर लुटा दिया फंड !

उत्तराखंड में कैग यानि CAG की रिपोर्ट आने के बाद उत्तराखंड सरकार के वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. कैग ने राज्य में 2019-20 से 2021-23 के दौरान कैंपा के तहत हुए कार्याें का मूल्यांकन किया है। इसमें कई अनियमितता का खुलासा किया.. CAG रिपोर्ट में वन विभाग के CAMPA फंड में घोटालों की लंबी फेहरिस्त सामने आयी जिससे वन विभाग के अधिकारीयों के साथ-साथ वन मंत्री सुबोध उनियाल पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तराखंड में वनों के संरक्षण और पुनर्वनीकरण के लिए आवंटित फंड को घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट (2019-2022) में ₹13.86 करोड़ की अवैध निकासी और वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है, सवाल यही है कि क्या वन मंत्री को इस घोटाले का कुछ भी पता नहीं था, जो इतने साल तक उनके सामने नहीं आ सका.. सबसे पहले आपको बताते हैं कि CAMPA फंड कहां-कहां बर्बाद हुआ।

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी अधिकारी ऐशो-आराम का सामान खरीदते रहे जिनमें iPhones, लैपटॉप, फ्रिज और कूलर की खरीद की बात सामने आयी है सरकारी इमारतों की मरम्मत और साज-सज्जा के पैसे से वन विभाग के ऑफिस और अफसरों के आवास चमकते रहे, लेकिन जंगल उजड़ते रहे जंगल बचाने के बजाय CAMPA फंड को कानूनी लड़ाइयों पर लुटाया गया ऐसी जगह को पौध रोपण के लिए चुना गया जहां  हकीकत में  पेड़ टिक ही नहीं सकते थे. 7 मामलों में 8 साल से ज्यादा की देरी से वृक्षारोपण किया गया.. देर से वृक्षारोपण, लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी से धन को लुटाया गया वनीकरण की स्थिति एकदम नाकाम रही. CAG के अनुसार, लगाए गए पेड़ों का सिर्फ 33.51% ही जिंदा बचा, जबकि Forest Research Institute के मानकों के अनुसार 60-65% सफलता दर होनी चाहिए थी.. मतलब वन विभाग लगाए गए पेड़ों को भी बचाने में नाकमयाब रहा, अफसरों की मिलीभगत ऐसी कि बिना सही जांच किए ही भूमि को उपयुक्त बताया गया और ऐसे अधिकारीयों के  खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा-

इतना ही नहीं सरकार की बड़ी लापरवाही और वित्तीय घोटाले का भी कैग की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है विभाग द्वारा  275 करोड़ का ब्याज नहीं चुकाया गया CAMPA ने कई बार अनुरोध किया, लेकिन राज्य सरकार ने 2019-22 के दौरान ब्याज नहीं चुकाया. 76.35 करोड़ के मंजूर प्लान पर कोई फंड जारी नहीं किया गया.  सरकार ने स्वीकृत योजनाओं पर भी पैसा नहीं दिया, जिससे परियोजनाएं ठप पड़ी रहीं जबकि जुलाई 2020 से नवंबर 2021 के बीच CEO ने Head of Forest Force की अनुमति के बिना फंड जारी किया, जो नियमों के खिलाफ था बिना केंद्र की मंजूरी के जंगलों की कटाई की गयी, राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी के बिना ही जंगलों को उद्योगों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सौंप दिया।

ये हाल वन विभाग के तब हैं जब उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में साल दर साल बेतहाशा वृद्धि हो रही है। 2002 में जंगल की आग की 922 घटनाएं हुई थीं जिनकी संख्या 2024 में 21 हजार पार हो गई। इन घटनाओं में एक लाख 80 हजार हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गए, भारतीय वन सर्वेक्षण  की हाल में जारी हुई रिपोर्ट पर गौर करें तो नवंबर 2023 से जून 2024 के बीच देश में वनों में दो लाख से अधिक घटनाएं हुईं। इनमें सर्वाधिक 74% की वृद्धि उत्तराखंड में रिकॉर्ड की गई। इसी कारण वनाग्नि में पिछले वर्ष 13वें नंबर पर रहा उत्तराखंड अब पहले स्थान पर है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी में न्याय मित्र की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि उत्तराखंड में वनाग्नि प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी है इसमें अग्निशमन उपकरणों, गश्ती वाहन और समन्वय के लिए संचार उपकरणों की कमी शामिल है.. लेकिन इस पर धायण देने के बजाय अधिकारी पैसा अपने ऐशो-आराम का सामान जुटाने में पैसे लुटा रहे हैं।

 

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वन विभाग का काम करने का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अभी हाल ही में हल्द्वानी में आग से बचाने के लिए की जाने वाली कंट्रोल बर्निग में कई नए लगाए पौधे भी जल गए इस पुरे घटनाक्रम से वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग आग बुझाने के बजाय नए पौधे ही जलाने में लग गया है,,, अब सवाल ये है इस सबके  जिम्मेदारों पर क्या कोई कार्रवाई होगी भी या नहीं CAG की रिपोर्ट ने वन विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है,,, क्या उत्तराखंड सरकार दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी या ये रिपोर्ट भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में ही दफन हो जाएगी ?

हाईकोर्ट के निर्देश, विधायक उमेश कुमार की वाई श्रेणी सुरक्षा से संबंधित रिकॉर्ड पेश करे सरकार

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नैनीताल हाईकोर्ट ने खानपुर विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के एक दूसरे के घर जाकर धमकाने, फायरिंग सहित गुंडागर्दी को लेकर स्वत: संज्ञान वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने विधायक उमेश कुमार को दी गई वाई श्रेणी सुरक्षा से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने, सुरक्षा की फिर से समीक्षा जल्द करने तथा सिंचाई विभाग के आवासों को खाली कराने के निर्देश सरकार को दिए हैं।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सरकार की ओर से बताया गया कि विधायक उमेश कुमार को वाई श्रेणी की सुरक्षा का मामला कमेटी के समक्ष लंबित है। सिंचाई विभाग का आवास खाली करने के लिए पूर्व विधायक चैंपियन को नोटिस दिया जा चुका है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि चैंपियन को सिंचाई विभाग का सरकारी आवास 2004 में जबकि विधायक उमेश को 2022 में आवंटित किया गया है।

यह भी बताया गया कि चैंपियन को आवंटित सरकारी आवास का मासिक किराया 9209 रुपये प्रति माह व विधायक उमेश शर्मा को आवंटित सरकारी आवास का मासिक किराया 1693 रुपये प्रति माह है। हाईकोर्ट ने दोनों विधायकों की ओर से एक दूसरे के आवास में जाकर धमकाने, हवाई फायरिंग सहित समर्थकों के हुड़दंग का स्वत: संज्ञान लिया था।

पूर्व सीएम की बेटी से फिल्म में निवेश और रोल दिलाने के नाम पर बड़ी ठगी, मुकदमा दर्ज

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उत्तराखंड के पूर्व सीएम व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी अभिनेत्री और निर्माता अरुषि निशंक से चार करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ठगी के आरोप में मुंबई के दो फिल्म प्रोड्यूसर, मानसी वरुण बागला और वरुण प्रमोद कुमार बागला के खिलाफ देहरादून के कोतवाली शहर में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों ने अरुषि को फिल्म में मुख्य भूमिका देने और बड़े मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये हड़प लिए।

अभिनेत्री अपनी प्रोडक्शन फर्म हिमश्री फिल्म्स के तहत फिल्म निर्माण और एक्टिंग से जुड़ी है। उन्होंने शिकायत में बताया कि मुंबई के प्रोड्यूसर मानसी और वरुण बागला ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने खुद को मिनी फिल्म्स प्रा. लि. के डायरेक्टर बताते हुए कहा कि वे आंखों की गुस्ताखियां  फिल्म का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें शनाया कपूर और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिका में हैं।

 

सीएम धामी ने लिया था फिल्म के सेट पर उद्घाटन समारोह में भाग
इन प्रोड्यूसर्स ने कहा कि इस फिल्म में एक और मुख्य भूमिका है, जिसे अरुषि को निभाने के लिए ऑफर किया गया। लेकिन इसके लिए शर्त रखी गई कि उन्हें पांच करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट करना होगा, जिससे उन्हें फिल्म की कमाई में 20% का हिस्सा मिलेगा। उन्होंने वादा किया कि अगर अरुषि को स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई या वे संतुष्ट नहीं हुईं तो उनकी रकम 15% ब्याज के साथ लौटा दी जाएगी।

अरुषि ने इन बातों पर भरोसा कर लिया और 9 अक्तूबर 2024 को हिमश्री फिल्म्स और मिनी फिल्म्स के बीच एमओयू साइन हुआ। इसके बाद 10 अक्तूबर 2024 को उन्होंने पहली किश्त के रूप में 2 करोड़ रुपये दिए। लेकिन बाद में अलग-अलग दबाव और बहानों से उनसे 19 नवंबर 2024 को 1 करोड़, 27 अक्तूबर 2024 को 25 लाख, और 30 अक्तूबर 2024 को 75 लाख रुपये और ले लिए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म के सेट पर उद्घाटन समारोह में भाग लिया था।

हरिद्वार जा रहे खानपुर विधायक उमेश कुमार को लच्छीवाला में पुलिस ने रोका, कोतवाली लाया गया

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हरिद्वार जा रहे खानपुर विधायक उमेश कुमार को पुलिस ने डोईवाला के पास रोक लिया। उमेश कुमार को पुलिस ने टोल टैक्स लच्छीवाला पर रोक कोतवाली लेकर आ गए।इस दौरान भारी पुलिस फोर्स मौजूद रहा। विधायक उमेश कुमार की पत्नी ने बताया कि वह शांतिपूर्वक बैठक में भाग लेने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बता दें, बीते रविवार को चैंपियन और उनके समर्थक बड़ी संख्या में उमेश कुमार के कार्यालय पर पहुंचे और जमकर तोड़फोड़ करते हुए समर्थकों से मारपीट कर दी थी। इस दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग भी की गई है।

कुछ देर बाद विधायक उमेश कुमार भी वहां पहुंच गए। वह भी बंदूक लेकर भागे और हंगामा कर दिया। जिसके बाद समर्थकों ने उन्हें संभाला। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और घटना की जानकारी ली।वहीं, देर शाम देहरादून में नेहरू कालोनी थाना पुलिस ने पूर्व विधायक कुंवर प्रवण सिंह चैंपियन को मामले में हिरासत में ले लिया। हरिद्वार पुलिस की ओर से पूर्व विधायक चैंपियन और वर्तमान विधायक खानपुर उमेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा उनके समर्थकों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।

Uttarkashi Fire: उत्तरकाशी में आग से 9 मकान जलकर हुए खाक, 25 परिवार हुए बेघर; एक महिला की मौत.

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मोरी तहसील मुख्यालय से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सावणी गांव में रविवार की रात को भीषण अग्निकांड हुआ। जिसमें 9 भवन खाक हो गए। ये सभी भवन देवदार और कैल की लकड़ी से बने थे। जिससे आग और तेज भड़की। इन भवनों में रखा सारा सामान भी जलकर खाक हो गया है। वहीं आग में झुलसने से एक 76 वर्षीय महिला की मौत हो गई है।

 

सड़क मार्ग स्थित जखोल से पांच किलोमीटर पैदल और अंधेरा होने के कारण राहत बचाव के लिए पहली टीम साढ़े तीन घंटे बाद सावणी पहुंची। लेकिन, उससे पहले गांव में मौजूद ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर कुछ हद तक काबू पाया। रात तीन बजे आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया। आग बुझाते समय कुछ ग्रामीण आग की लपटों से भी झुलसे। सावणी गांव में वर्ष 2018 में भीषण अग्निकांड हुआ था। जिसमें 39 मकान जले 100 मवेशी जले थे।

 

आग ने लिया विकराल रूप-

सावणी में रविवार की रात करीब नौ बजे किताब सिंह के मकान में आग लगी। लकड़ी के मकान होने के कारण आग विकराल होती गई। आग जब एक घर से दूसरे घर में फैलने लगी तो जखोल गांव के ग्रामीणों ने करीब 11 बजे जिला आपदा प्रबंधन व प्रशासन को इसकी सूचना दी।

 

जिलाधिकारी डॉ. मेहराबन सिंह बिष्ट के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्यो के लिए चिकित्सा, पेयजल आदि विभागों को भी मौके पर पहुंचने के लिए निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने राहत व बचाव कार्यों के लिए सतलुज जल विद्युत निगम सहित टोंस वन प्रभाग और गोविंद वन्य जीव विहार के वन कर्मियों का सहयोग लेने के लिए कहा। करीब 12:30 बजे राहत बचाव के लिए गोविंद वन्य जीव विहार की पहली टीम पहुंची।

 

9 मकान जलकर हुए खाक-

उपजिलाधिकारी देवानंद शर्मा ने बताया कि आग पर पूरी तरह से काबू पाया गया है। राजस्व विभाग के साथ पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, पशुपालन विभाग और वन विभाग मौके पर मौजूद है। गांव में कुल 9 मकान पूर्ण रूप से जल चुके है। जिसमें करीब 15-16 परिवार निवास करते थे। इसके अतिरिक्त 2 मकानों को आग से बचाने के लिए पूर्ण रूप से तोड़ा गया है। 3 मकानों को आंशिक रूप से तोड़ा गया है। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं है।

 

बताया जा रहा है कि किताब सिंह के घर में पूजा का दीया जल रहा था, जिससे आग लगना बताया गया है। इस अग्निकांड में 22-25 परिवार प्रभावित हुए हैं। जिला आपदा प्रबंधन ने मिसिंग चल रही भामा देवी (76) पत्नी नेगी सिंह की आग से झुलसने से मृत्यु होने की पुष्टि की है।

 

Uttarakhand News: प्रदेश के 29 शहरों की बिजली चोरी पड़ रही UPCL पर भारी, देखिए चौंकाने वाले ये आंकड़े.

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उत्तराखंड के 29 शहरों की बिजली चोरी यूपीसीएल पर भारी पड़ रही है। इस बार यूपीसीएल ने नियामक आयोग में जो पिटीशन फाइल की है, उसमें इन शहरों का लाइन लॉस व एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटी एंड सी) लॉस भी खुलकर स्पष्ट किया है।

इनमें मैदानी जिलों हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के कई शहर तो बिजली चोरी में शीर्ष पर हैं। बिजली चोरों पर लगाम लगाने की कोशिशों में यूपीसीएल की टीम के साथ मारपीट आम बात हो चुकी है। बीते एक साल में प्रदेशभर में करीब 15 ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें बिजली चोरी पकड़ने गई टीमों पर हमला हुआ है।

इतने जोखिम के बावजूद यूपीसीएल 29 शहरों में बिजली चोरी रोकने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि मैदानी जिलों के कुछ शहर तो ऐसे हैं, जहां बिजली चोरी से होने वाला लाइन लॉस 80 फीसदी से भी ऊपर है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लाइन लॉस को अगर तकनीकी लॉस के तौर पर देखें तो यह अधिकतम आठ से नौ फीसदी तक होना चाहिए, लेकिन यहां इससे 10 गुना तक लॉस हो रहा है।

बिजली बिल देने में पीछे-
इन शहरों में बिजली बिल वसूली के हालात और भी चिंताजनक नजर आते हैं। केवल बाजपुर, देहरादून, हरिद्वार, जसपुर, काशीपुर, खटीमा, कोटद्वार, मसूरी, पौड़ी, पिथौरागढ़, रानीखेत, ऋषिकेश, टनकपुर और विकासनगर में राजस्व वसूली 100 फीसदी है। बाकी शहरों में आंकड़ा 85 से 95 के बीच है। बिल देने के मामले में भी आंकड़े काफी कमतर हैं। यूपीसीएल ने खटीमा में 47 प्रतिशत, जोशीमठ में 48 प्रतिशत, गदरपुर और गोपेश्वर में 78-78 प्रतिशत बिलिंग एफिशिएंसी बताई है।

Pauri Accident: पौड़ी अस्पताल में कतिपय समस्याओं पर मुख्यमंत्री ने तलब की रिपोर्ट, दिए ये निर्देश.

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पौड़ी बस हादसे के बाद, पौड़ी अस्पताल में सामने आई अव्यवस्थाओं की शिकायत का संज्ञान लिया है। इस सम्बंध में मुख्यमंत्री ने पौड़ी के जिलाधिकारी से मामले में रिपोर्ट तलब करने के साथ ही, अस्पताल में सभी बुनियादी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बस हादसे में मृतक परिजन को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से अतिरिक्त 3 लाख रुपए और गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए की सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

 

बस हादसे के घायलों को पौड़ी अस्पताल में समुचित इलाज देने में अव्यवस्था, संबंधित शिकायत पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज कैम्प कार्यालय में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाह अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए, अस्पताल में आपात स्थिति के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।

 

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बस हादसे के घायलों को पौड़ी अस्पताल में समुचित इलाज देने में अव्यवस्था, संबंधित शिकायत पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को कैम्प कार्यालय में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होने इस मामले में पौड़ी के डीएम से रिपोर्ट तलब की है, साथ ही कहा है कि लापरवाह अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाई करते हुए, अस्पताल में आपात स्थिति के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तराखंड में दूर दराज तक स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क उपलब्ध है। ऐसे में अस्पतालों में गंभीर बीमार या घायलों के उपचार में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए प्रदेश भर के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के साथ ही, आवश्यक दवाई ओर मेडिकल स्टॉफ की उपलब्धता हर वक्त सुनिश्चित की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने बस हादसे के कारणों की जांच कर परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पाए जाने पर कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।