Day: March 24, 2025

उत्तराखंड के इस ज‍िले में 1 लाख लोगों पर मंडराया राशन का संकट, न‍िरस्‍त हो सकते हैं Ration Card.

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हल्द्वानी-  जिले के 25 हजार 402 राशन कार्डधारकों ने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराई है। ऐसे में एक लाख चार हजार 567 उपभोक्ताओं (यूनिट) पर राशन का संकट मंडराने लगा है। जल्द ही अगर इन 25 हजार राशन कार्डधारकों ने ई-केवाईसी नहीं कराई तो इनके राशन कार्ड निरस्त हो जाएंगे। इसके बाद इन उपभोक्ताओं को सरकार की ओर से मिलने वाला निश्शुल्क व न्यूनतम दरों में राशन नहीं मिल पाएगा।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से राशन कार्ड की ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया गया है। जिले में कुल 2 लाख 46 हजार 662 राशन कार्ड धारक हैं, जिसमें 10 लाख यूनिट राशन वितरण होता है। इसमें से करीब 2 लाख 21 हजार 260 राशन कार्ड धारकों ने ई-केवाईसी करा ली है।

 

केंद्र सरकार की ओर से अंत्योदय (लाल) व प्राथमिक परिवार (सफेद) के लोगों को मुफ्त राशन दिया जाता है। जबकि राज्य सरकार की ओर से राज्य खाद्य योजना (सफेद) से जुड़े लोगों को न्यूनतम दरों में सस्ता गल्ला दुकानों से राशन मिलता है।

 

31 मार्च तक अंतिम मौका-

क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी विजय जोशी ने बताया कि ई-केवाईसी नहीं कराने वाले राशन कार्डधारकों को कई बार अंतिम मौका दिया गया। इस बार भी उपभोक्ताओं को 31 मार्च तक अंतिम मौका दिया जा रहा है। अगर इस बार इन उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी नहीं कराई तो इनके राशन कार्ड को निरस्त कर दिया जाएगा। फिर इन्हें सरकार की ओर से राशन की सुविधा नहीं मिलेगी।

 

ई-केवाईसी के लिए सिर्फ तीन दस्तावेज जरूरी-

राशन कार्ड को ई-केवाईसी कराने के लिए सिर्फ तीन दस्तावेज आधार कार्ड, राशन कार्ड नंबर व पंजीकृत मोबाइल नंबर की जरूरत है, जिसे हम अपने नजदीकी सस्ता गल्ला दुकान में जाकर भी करवा सकते हैं।

घर बैठे खुद से भी कर सकते हैं ई-केवाईसी-

खाद्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, प्ले स्टोर में माई राशन 2.0 एप डाउनलोड करें। इसके बाद एप में मांगी गई जानकारी भरकर लागिन करें, फिर दोबारा जानकारी भरें। इसमें आधार नंबर डालकर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

Uttarakhand: धामी सरकार के 3 साल बेमिसाल ने सोशल मीडिया पर मचाया धमाल.. धामी के 3 वर्षों के कार्यकाल को जनता ने सराहा.

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सरकार के तीन साल X पर टॉप ट्रेंड बना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 3 वर्षों के कार्यकाल को जनता ने सराहा

धामी सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों पर जनता की मुहर

 

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सफल तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोशल मीडिया पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। #DhamiKe3SaalBemisaal हैशटैग के साथ हजारों लोगों ने ट्वीट किए और धामी सरकार को सेवा, सुशासन और विकास के इन तीन वर्षों के लिए शुभकामनाएँ दीं।

आज दोपहर #DhamiKe3SaalBemisaal हैशटैग तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रेंड करने लगा। देखते ही देखते अनेक ट्वीट्स और पोस्ट्स के साथ यह हैशटैग टॉप ट्रेंडिंग में आ गया। लोग उत्तराखंड सरकार की विभिन्न उपलब्धियों—इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, धार्मिक पर्यटन, निवेश, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन—को लेकर अपने विचार साझा कर रहे थे।

 

जनता का अभूतपूर्व समर्थन-

उत्तराखंड के आम नागरिकों के अलावा, राजनीतिक हस्तियों, युवा वर्ग, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। लोगों ने धामी सरकार की नीतियों और प्रदेश के विकास में उनके योगदान की सराहना करते हुए पोस्ट किए।

X पर टॉप ट्रेंड बना #DhamiKe3SaalBemisaal-

लगातार बढ़ते समर्थन और जनता की भागीदारी के कारण #DhamiKe3SaalBemisaal X पर ट्रेंड करता रहा और टॉप पोजिशन पर बना रहा। यह उत्तराखंड सरकार की नीतियों और जनता के विश्वास का प्रमाण है। यह न केवल सरकार की उपलब्धियों को उजागर करता है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन को भी दर्शाता है।

Uttarakhand: समर्पित शिक्षकों को बिना आवेदन भी मिलेगा शैलेश मटियानी पुरस्कार, कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव.

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प्रदेश में शिक्षा के प्रति समर्पित और उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सरकार अब बिना आवेदन भी राज्य शैक्षिक शैलेश मटियानी पुरस्कार देगी। शिक्षा मंत्री डाॅ.धन सिंह रावत के मुताबिक इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। मंत्री के मुताबिक कुछ शिक्षक, शिक्षा के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं। इनमें से एक हैं, बागेश्वर के कपकोट स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ख्याली दत्त शर्मा।

उनके व विद्यालय के अन्य शिक्षकों के प्रयासों से विद्यालय में न सिर्फ छात्र-छात्राओं की संख्या कई गुना बढ़ी है, बल्कि विद्यालय के कई छात्रों का सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में चयन हुआ है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक इस स्कूल में पूर्व में मात्र नौ छात्र-छात्राएं थे, लेकिन विद्यालय के शिक्षकों के प्रयास से स्कूल में वर्तमान में 282 बच्चे अध्ययनरत हैं। जबकि 200 अन्य बच्चे इस स्कूल में दाखिला चाहते हैं।

स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उन्हें बताया कि स्कूल में पर्याप्त भवन हो तो छात्र-छात्राओं की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने जब स्कूल के प्रधानाध्यापक को शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए आवेदन करने के लिए कहा तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, यदि वह इसके योग्य हैं तो उन्हें खुद इसके लिए चयनित किया जाना चाहिए।

यही वजह है कि सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी कि इस तरह के शिक्षकों को बिना आवेदन भी शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार के लिए चयनित कर सम्मानित किया जाए। शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि इस स्कूल के भवन के लिए सरकार ने एक करोड़ 10 लाख रुपये दिए हैं।